Friday, 28 August 2015

कलाई पर बंधा प्यार का अनोखा बंधन (जानिये राखी के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को )



By:- Arahan singh dhami 


ये बंधन है भाई - बहन के प्यार का, इसे सिर्फ धागा मत समझ लेना। 
हर बहन है शक्ति का रूप उसे अबला मत समझ लेना। 

भाई रक्षा करेगा सिर्फ इसी वजह से  हमारी बहने अपने भाइयों के कलाइयों पर राखी नही बांधती, बल्कि वो तो खुद इस दिन प्रण करती है की कभी उसका भाई किसी मुसीबत में पड़ जाय तो वह भी उसकी रक्षा करेगी।
क्योंकि हमारी बहने इतनी कमजोर नही की, उसे अपने भाई को इसीलिए राखी बांधनी पड़े के वो उसकी रक्षा करेगा, बल्कि बहने भी इस दिन अपने भाई को हर मुसीबतों से बचाने का संकलप लेती हैं। रक्षाबंधन एक बहुत ही पवित्र बंधन है भाई और बहिन के बीच, जो दोनों को जीवन भर बांधे रहता है। बहन जैसे ही राखी बांधती है भाई मन में प्रण लेता है की " चाहे कोई भी परिस्थिति  क्यों न हो मैं अपनी बहन की रक्षा सदैव करूँगा , चाहे मैं कहीं भी क्यों न हूँ। " साथ ही भाई अपनी बहन की  लम्बी एवं खुशहाल ज़िन्दगी की कामना करता है। और उसे सप्रेम भेंट  (उपहार ) देता है। और भगवान से प्रार्थना करता है की उसकी बहन को हर पल ढेर सारी खुशियां देना।
ये एक अनोखा बंधन है जिसे शब्दों में बयां करना संभव नही। राखी की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है।  आईये इसके पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व को जाने।
   
रक्षाबंधन  हिन्दू श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के पूर्णिमा के दिन मनाया 

जाने वाला त्योहार है। जो भाई का बहन



के प्रति प्यार का प्रतिक है।  


ऐतिहासिक महत्व :- मेवाड़ की महारानी कर्मावती  ने मुग़ल राजा हुमायूँ  को राखी भेजकर अपनी राज्य में आक्रमण न करने की प्रार्थना की। महारानी कर्मावती विधवा थी , उनकी पति महाराजा राणा सांगा थे। मुस्लिम होते हुए भी हुमायूँ ने राखी की लाज रखी। और राज्य पर आक्रमण नही किया।  उल्टा वे मेवाड़ की और से बहादुरशाह के विरुद्ध लड़े , और मेवाड़ राज्य की रक्षा की।

चंद्रशेखर आजाद का प्रसंग:-

बात तब की है जब क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत थे और फिरंगी उनके पीछे लगे थे। 
 वे फिरंगियों से बचने के लिए शरण लेने हेतु तूफानी रात को एक घर में जा पहुंचे। जहां एक विधवा अपनी बेटी के साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आजाद को डाकू समझ कर पहले तो वृद्धा ने शरण देने से इनकार कर दिया, लेकिन जब चंद्रशेखर आज़ाद  ने अपना परिचय दिया तो उसने उन्हें ससम्मान अपने घर में शरण दे दी। बातचीत से आजाद को पता चला कि गरीबी के कारण विधवा की बेटी की शादी में कठिनाई आ रही है। आजाद ने महिला को कहा, 'मेरे ऊपर पांच हजार रुपए का इनाम है, आप फिरंगियों को मेरी सूचना देकर मेरी गिरफ़्तारी पर पांच हजार रुपए का इनाम पा सकती हैं।  जिससे आप अपनी बेटी का विवाह आसानी से करवा सकती हैं।

यह सुन विधवा रो पड़ी और उसने कहा - “भैया! तुम देश की आजादी हेतु अपनी जान हथेली पर रखकर घूमते हो और न जाने कितनी बहू-बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकती।” यह कहते हुए उसने एक रक्षा-सूत्र आजाद के हाथों में बाँध कर देश-सेवा का वचन लिया। सुबह जब विधवा की आँखें खुली तो आजाद जा चुके थे, अचानक उसने देखा कि तकिये के नीचे 5000 रूपये हैं । उसके साथ एक पर्ची भी थी जिस पर लिखा था- “अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट- आजाद।”

पुरू का प्रसंग:- सिकंदर जो की कभी पराजित नही हुआ था, वह पुरू के बारे में सुनकर विचलित हो गया। ये बात सिकंदर की पत्नी की पत्नी को ज्ञात हो गयी , पुरू से अपनी पति की रक्षा करने के लिए उसने पुरू को राखी बांधकर भाई बनाया, और युद्ध में सिकंदर को न मारने का वचन लिया। इसी कारण से युद्ध में पुरू ने राखी के वचन को निभाया और सिकंदर को जीवनदान दिया।    


मैंने पढ़ा, शत्रुओं को भी

जब-जब राखी भिजवाई

रक्षा करने दौड़ पड़े वे

राखी-बन्द शत्रु-भाई॥


पौराणिक महत्व:- भगवान श्री कृष्ण द्वारा शिशुपाल का वध करते समय, कृष्ण जी की तर्जनी ऊँगली में चोट आ गए गई , तो उस समय द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साडी फाड़कर उनकी ऊँगली पर बाँध दी थी। यह घटना श्रावण मास की पूर्णिमा को घटी थी।
  द्रौपदी का जब चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने उनकी लाज बचाकर राखी की लाज बचाई।

वामनावतार का प्रसंग:-  रक्षाबंधन का प्रसंग वामनावतार नामक पौराणिक कथा में भी मिलता है। राजा बलि ने यज्ञ सम्पन्न कर स्वर्ग पर अधिकार का प्रयत्न किया, और देवराज इंद्रा ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की।

विष्णु जी वामन ब्राह्मण बनकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। उन्होंने बलि से तीन पग भूमि दान 

में मांग ली और राजा बलि ने दान कर दी। वामन भगवान ने तीन पग में आकाश-पाताल और धरती को 

नाप दिया और राजा बलि को रसातल में भेज दिया। राजा बलि ने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से 

हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। इससे लक्ष्मी जी चिंतित हो गई। और नारद जी की सलाह 

पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और उसे रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया, और बदले में विष्णु 

जी को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी। 


और तब से ये श्लोक प्रकाश में आया :- येना बद्धो बलीराजा दानवेन्द्रो महाबलह् !                                                                                             तेन त्वामपि बध्नामि रक्शे मा चल मा चल !

  पंडित रक्षा सूत्र बांधते समय इसी मंत्र का उच्चारण करते हैं। 

राखी सिर्फ भाई - बहन के बीच का कार्यकलाप नही रह गया है। आज राखी देश की रक्षा, पर्यावरण रक्षा, 

हितों की रक्षा आदि के लिए भी बाँधी जानी लगी है। 


उत्तराखंड के पिथौरागढ़ शहर में स्कूल की बालिकाएं स्कूल में लगाये पेड़ो पर धागा बांधते हैं और सालभर 

उनकी देखभाल करती हैं। 



आज कई भाइयों की कलाई पर सिर्फ इसीलिए राखी नही बंध पाती, क्योंकि उनकी बहनो को उनके माँ-बाप 

ने दुनिया में आने ही नही दिया। पुत्र प्राप्ति की लालसा में उनके माँ - बाप उनकी बहनो को कोख़ में ही 

मार देते हैं। यह एक जघन्य अपराध है। 



इस बार राखी में बहने अपने भाइयों से एक वचन ले, उन्हें बोले की जैसे तुम मेरी इज्ज़त और सम्मान करते हो 

वैसे ही दूसरों की बहनो की भी इज्जत और मान सम्मान करे उनके साथ भी अच्छा व्यवहार करे। 
  
हमारा निवेदन है की दूसरों की बहनो से बुरा या गलत व्यवहार करने से पहले ज़रा अपनी बहन के बारे में 

सोच लेना। क्योंकि उसकी साथ भी कोई बुरा बर्ताव कर सकता है , तब आपको कैसा लगेगा। 

                                 रक्षाबंधन की ढेर सारी बधाइयाँ  





  
           

Monday, 17 August 2015

बेटा कहीं बाहर क्यों नहीं जाते?



Note:- ये एक काल्पनिक वंग्यात्मक लेख है। 
By:- Arahan Singh Dhami





रोज़ की तरह उस दिन भी मैं टाइम पास के लिए गेम खेल रहा था, एक दो घंटे बाद बोरियत होने लगी, तो सोचा आराम कर लूँ , तीन घंटे हो गए सोते - सोते मम्मी ने लंच के लिए उठाया, मम्मी ने  मेरे लिए खाना डाला और पड़ोस में आंटी के वहाँ चली गई।  खाना खाने के बाद सोचा चलो फिर से आराम कर लेता हूँ, जैसे ही आराम करने के लिए जा रहा था , तो door bell बजी, मैं दरवाजा खोलने चला  गया, सोचा मम्मी होगी, लेकिन दरवाजा खोलते ही मेरे सामने पड़ोस के अंकल थे, मैंने उन्हें नमस्ते किया और अंदर आने को कहा, अंकल ने पूछा बेटा घर पर और कोई नही है क्या ? मैंने कहा भाई market गया है और मम्मी पड़ोस की आंटी के वहां गयी है। उन्होंने बोला कोई बात नही, लो  ये मिठाई खाओ, मैंने पूछा किस खुशी में मिठाई खिला रहे हो अंकल?  अंकल बोले बेटा मेरे लड़के की MNC (Multi national company) में नौकरी लग गयी है, मैंने उन्हें बधाई दी और बोला अंकल आपके लड़के का तो इंजीनियरिंग का लास्ट साल था, अंकल बोले हाँ बेटा लास्ट साल था पर उसका कैंपस इंटरव्यू में selection हो गया और ,  exam होते ही रिजल्ट आने के बाद जॉब पर लग जाएगा, मैंने बोला अंकल अगर आपका बेटा लास्ट Year के exam में fail हो गया, तो क्या तब भी उसे job मिलेगी ? अंकल थोड़ा चीड़ गए  और गुस्सा हो गए, बोला मेरा बेटा आजतक अच्छे grade से पास होते आया है, तो भला फ़ैल क्यों होगा? फिर अंकल ने पूछा तुम नौकरी के लिए कहीं बाहर क्यों नही जाते ? यहाँ क्या रखा है? शहर जाओ कोई नौकरी ढूंढो। वैसे भी जब भी मैं तुम्हे देखता हूँ, तुम सोये मिलते हो, मैंने बोला अंकल वो मैं आराम करके तक जाता हूँ इसीलिए दुबारा आराम करता हूँ। अंकल बोले क्या ? मैंने कहा मज़ाक कर रहा हूँ अंकल। अंकल ने बोला मज़ाक तुम अपनी ज़िन्दगी के साथ कर हो। मेरे बच्चों को देखो दोनों सेटल हो गए हैं, लड़का engineer बन जाएगा और लड़की बाहर teacher है, मैंने अपने मन में "बोला तुम्हारा लड़का engineer बन कर क्या उखाड़ लेगा"।   अंकल ने पूछा बेटा अच्छा ये बताओ तुम यहाँ (पहाड़ ) में कर क्या रहे हो?  यहाँ तो कोई company भी नही है काम करने को, यहाँ रहना बेकार है। मैंने ज़वाब दिया अंकल मैं यहाँ पलायन रोकने के लिए रुका हूँ।  अंकल हँसते हुए बोले बेटा जब नेता पलायन नही रोक सके तो तू अकेला कैसे रोकेगा।  मैंने बोला अंकल शुरुवात अकेले ही करनी पड़ते है , बाद में कारवां अपने आप बन जाता है। 
      
पहाड़ से सभी बाहर शहर को जातें हैं , पड़ने के लिए कोई engineer बन जाता है कोई डॉक्टर और कोई teacher, और वो वहीँ के होक रह जाते हैं, पहाड़ के लिए कुछ नही करते।  बाद में खुद बोलते हैं "यार पहाड़ में क्या रखा है ? ऐसे ही लोगों की वजह से पलायन होता है , engineer , डॉक्टर तो बन जाते हैं किन्तु अपनी सेवा  पहाड़ में नही देते , अगर अपना engineer दिमाग पहाड़ों के landslide रोकने के लिए लगाते तो रोड block की समस्या नही होती, hospital हैं पर doctor नही हैं , अगर वो doctor बन कर यहाँ आते तो लोगों को इलाज़ के लिए बाहर नही जाना पड़ता , ऐसा ही हाल स्कूलों का है , अगर हर बंदा अपनी पोस्टिंग पहाड़ में करा ले तो , कितना अच्छा होता , लेकिन पहाड़ी होते हुए भी वो पहाड़ नही चढ़ना चाहते , जबकि मैदानी area  से ज्यादा सैलरी पहाड़ में doctor और टीचरों को मिलती है।  ये बातें सुनकर मैंने अंकल में पहाड़ प्रेम की भावना जगा दी। उन्होंने  बोला  बेटा तू सच्चा पहाड़ी प्रेमी है, हमारी वजह से भी पहाड़ों से पलायन होता है ,बेटा अब मैं अपने बेटे  बोलूंगा की, नौकरी लगने के बाद पहाड़ में भी अपनी सेवा देना, और अपनी बेटी को यहाँ ट्रांसफर करने को बोला हूँ , बेटा मैं तुझे बेकार, आलसी समझता था लेकिन अब मुझे तुझ पर गर्व है , ऐसा बोलकर uncle चले गए , और मैं भी सोने चले गया, थक जो गया था इतना लम्बा भाषण देकर। 10 minute बाद मेरे भतीजे का फ़ोन आया , मैंने उससे पूछा कहाँ  है आजकल ? वो बोला चाचू Mumbai में हूँ और जॉब कर रहा हूँ , वो बोला आप क्या कर रहे हो आजकल? मैंने बोला कुछ नही बेकार हूँ, फिर मैंने बोला यार भतीज कोई जुगाड़ लगा मेरा भी वहां पर , कोई भी काम मिले चलेगा पर कुछ काम ढूंढ मेरे लिए।  साला यहाँ पहाड़ में कुछ नही है। बेकार है यहाँ रहना। भतीज बोला भतीज बोला यहाँ  आ जाओ उसके बाद ढूंढ लेना काम।  मैंने बोला ठीक है, जल्दी ही वहां आता हूँ। नही तो यहाँ रहकर ज़िन्दगी बेकार हो जायेगी।

   The moral of the story is दूसरों को भाषण देने से पहले उस बात को खुद पर लागू करो , उसके बाद ही दूसरों को बोल बच्चन दो। 

Monday, 13 July 2015

बेटा- माँ मैं आत्महत्या करने जा रहा हूँ ।

 


By:- Arahan Singh Dhami

Note:- ये एक व्यंग्यात्मक काल्पनिक लेख है। 

इस Digital युग में हर कोई आगे रहना चाहता है, चाहे वो सोशल नेटवर्किंग site पर  ही क्यों न हो।
आज के युग के लोग Real life से ज्यादा virtual life में busy रहते हैं, यानी सोशल नेटवर्किंग sites पर। कुत्ते, बिल्ली, गाय , भैंस, बकरी सभी का सोशल नेटवर्किंग sites  पर account मिल जाएगा, तो गाऊँ और छोटे शहर के लोग क्यों पीछे रहे, ऐसे ही एक छोटे से शहर का लड़का, जिसके शहर में social networking site का चलन नया - नया था, फेसबुक पर अकाउंट बनाता है, profile picture पर Ranbir kapoor की picture लगाता है, FB पर about वाले section में अपने बारे में English में लिखता है:- My Attitude is complicated to understand.ये लाइन शायद उसने कहीं सुनी या पढ़ी होंगी, तो इसी को Details about You में चिपका दिया, 10-12 दिन के अंदर उसके 300 frndz बन गए। ऐसा देखते ही उसे ख़ुशी हुई, अब तो हर जगह, हर वक़्त mobile पर लगा रहता, क्या घर क्या school, सब जगह mobile ही उसका साथी बन चूका था, मोबाइल पर Fb चलाने के सिवा उसका कोई दूसरा काम नही था, इस वजह से वो पढ़ाई में भी dull होता जा रहा था। असल ज़िंदगी के दोस्तों से दूरी बढ़ती जा रही थी,FB पर अकाउंट बनाये हुए उसे "6" महीना हो गया था, अब उसके पास Fb चलाने का "6" महीनों का experience था, वो अपनी wall पर शायरी, quotation, post करता, और उसकी पोस्ट पर likes और comments भी मिलते,एक दिन उसे ख़याल आया, कब तक bollywood, Hollywood actors को अपनी profile picture बनाऊंगा, क्यों न अपनी रियल फोटो को ही Profile picture बनाऊ, उसने अपनी सबसे अच्छी Pic select की उसे Edit किया,और profile picture बनाने के लिए upload कर दिया, upload करते ही उसने logout कर दिया, ताकि एक - दो  घंटे बाद देखूँ की कितने likes और comments मिले हैं , जैसे ही दो घंटे बाद वो अपना FB account login करता है, तो दुःखी हो जाता है, देखता है, profile pic को सिर्फ एक ही like मिला है, वो भी खुद का, लेकिन जैसे ही comments देखता है तो खुश हो जाता है, बहुत सारे comments मिले होते हैं उसे, लेकिन जैसे ही कमेंट्स पड़ता है तो निराशा हाथ लगती है, वो उसी  समय logout कर देता है, और depress फील करता हुए सोचता है क्या में इतना बुरा हूँ, जो मेरे फोटो को एक भी like नही मिले, और इतने गंदे comments मिले, मुझे असल ज़िन्दगी में भी कोई अच्छा नही मानेगा, वो सोचता है ज़िन्दगी यही खत्म हो गयी, और sucide करने की योजना बनाता हुआ घर से बाहर की  ओऱ जाता है, इतने में उसकी माँ उसे बोलती है बेटा  कहाँ  जा रहा है? (उसकी माँ पढ़ी - लिखी समझदार महिला थी) बेटा बोलता है:- "माँ मैं  आत्महत्या करने जा रहा हूँ," उसकी माँ एकदम सकते में आ जाती है,और बेटा बोलता है ;- माँ मुझे मत रोकना, माँ उसे अपनी कसम दे कर रोक लेती है, और उससे पूरी बात मालुम कर लेती है, और बोलती है, इतनी सी बात पर आत्महत्या करने जा रहा है, मैंने तो नही की थी  आत्महत्या,  बेटा:- क्या मतलब?
मतलब ये की मैंने  भी FB पर id बनाई थी, katrina kaif  की photo को profile pic बनाया था बेटा, और एक लड़के से chatting भी करने लगी थी, उसने Hrithik की pic लगाई थी, और अपनी age 23 साल बताई,उस लड़के से चैटिंग करके मुझे लगा मेरा जलवा अभी -भी कायम है, और मेरा confidence level भी high हो गया था, एक दिन मैंने अपनी real pic upload की, ये दखने के लिए कि कितने likes मिलते हैं, बेटा:- तो कितने likes मिले माँ ? माँ :- एक, वो भी उस लड़के का जिससे मैं चैटिंग करती थी,मैं निराश हो गई, मैंने सोचा क्या मेरा चेहरा इतना गंदा है, उस समय मुझे भी तेरे जैसी feeling आई, लेकिन ठीक उसी समय उस लड़के ने msz किया की  वो मुझ से मिलना चाहता है, तब मैंने सोचा कोई like करे या न करे, लेकिन जो मेरी Real pic दखने के बाद भी मुझ से मिलना चाहता है, वो ज़रूर अच्छा इंसान होगा, इसीलिए मैं चली गई उससे मिलने। बेटा मैं coffee शॉप  बड़े अरमानों से गयी थी ,लेकिन जैसे ही वहां पर गंजे आदमी को देखा तो मेरा मूड ख़राब हो गया।  बेटा:- माँ उस गंजे आदमी को देखकर आपका मूड ख़राब क्यों हो गया ? माँ :- बेटा वो गंजा आदमी तेरे पापा थे, तो पापा ने तो आपको रँगे हाथों पकड़ लिया होगा उस  लड़के के साथ, माँ :- नही पकड़ा क्योंकि जिस लड़के से मैं chatting करती थी, और जिसने मेरी Real pic को like किया था, वो तेरे पापा ही थे, बेटा:- तो पापा ने आपको क्या बोला, बेटा पापा ने बोला:- मैं ही हूँ तुम्हारा Hrithik Rosan जिससे तुम मिलने आई हो , मेरी katrina. बेटा उस दिन मैंने सोचा अच्छा ही हुआ की, जाने - अनजाने मैंने तेरे पापा से चैटिंग की, अगर कोई और होता तो मैं उसके चक्कर में फँस जाती, और तेरे दो पापा होते।उस दिन मुझे समझ में आया, virtual वर्ल्ड से ज्यादा जो हमारे रियल लाइफ में हैं उन रिश्तों को अहमियत देनी चाहिए। virtual वर्ल्ड में आपको likes और कमेंट्स मिले न मिले लेकिन आपको रियल लाइफ में अपनों का प्यार मिलना चाहिए, और उनको प्यार देना भी चाहिए।
बैठे ने सोचा माँ सच बोल रही है या झूठ, जो भी है, मेरी आँखें खुल गई। माँ की बात सुन कर उस लड़के को समझ में आ गया की virtual वर्ल्ड से मिले likes और comments से ज्यादा Real लाइफ में अपने परिवार और सच्चे दोस्तों की  बातों को तवज्जो देना चाहिए।      

Monday, 6 July 2015

बुआ 500 रु दो अपनी ज़िन्दगी बनाता हूँ



By- Arahan singh dhami

Note:- ये सब कालपनिक है, ये व्यंग्यात्मक लेख है। 








एक लड़का जिसकी उम्र 16 - 17 साल होगी अपनी बुआ के साथ शहर में रहता था, उसकी बुआ रिटायर्ड टीचर थी, और उस लड़के को गाऊँ से शहर पढ़ाने के लिए लायी थी, क्योंकि गाऊं में अच्छा स्कूल नही था, गाऊँ के ज्यादातर बच्चे भी गाऊँ छोड़कर शहर में पड़ने आ गए थे, इसीलिए उस लड़के के बुआ उसको शहर ले आई।        6 - 7 महीने तो वो लड़का आज्ञाकारी बन कर रहा, उसने अपनी बुआ का भरोसा  जीत लिया था, उसकी बुआ को लगने लगा की वो सीधा - साधा और होशियार लड़का है, लेकिन उसकी बुआ को क्या पता था जिसको वो सीधा - साधा सोच रही है, उसे शहर की हवा लग चुकी है, एक  दिन उस लड़के ने अपनी बुआ से कहा- "बुआ मुझे 500 रु दो मैं अपनी ज़िन्दगी बनता हूँ", उसकी बुआ हँस कर बोली- बेटा 500 रु में कैसे ज़िन्दगी बनाएगा तू ? लड़का बोला बुआ में tution लगाउँगा और मेहनत करूंगा।  बुआ बोली बेटा 500 रु  में तो एक ही subject पड़ पायेगा, वो बोला बुआ मैंने सस्ता tution ढूंढ लिया है, 200 रु, मैथ्स के,  200 रु science के, और मेरे दोस्त का भाई  सिर्फ 100 रु में इंग्लिश का tution पढ़ाने को तैयार है, उसकी बुआ खुश हुई, सोचा आज के इस जमाने में 500 रु में तीन subject कौन पढ़ाता है, और उसकी बुआ ने उसे 500 रु दे दिए, उस दिन छुटटी का दिन था, लड़का बोला बुआ में आज से ही tution जाऊँगा, आज दिनभर पढूंगा और शाम को आऊंगा, इसीलिए आप चिंता मत करना, उसकी बुआ ने बोला ठीक है , और वो किताब और नोटबुक लेकर चला गया, जाने से  पहले उसने अपनी बुआ के पैर छुए, और बोला बुआ मुझे आशीर्वाद दो. बुआ बहुत खुश हुई,  बोली ऐसे ही मेहनत करना, आगे बढ़ना।  दिन गुजर गया, और दिन से रात हो गई, वो लड़का घर नही आया, उसके पास मोबाइल भी नही था, उसकी बुआ को चिंता होने लगी, वो दरवाज़े पर खड़े होकर गली में  दखने लगी, इंतज़ार करते-करते 11 बज गए वो लड़का  अभी तक नही आया, गली में  एक ही पोल लाइट जल रही थी, इतने में उसकी बुआ ने देखा कुछ परछाई गली की ओर आगे बढ़ते जा रही थी, नज़दीक आने पर देखा दो लड़के एक लड़के को सहारा देकर ला रहे हैं, उसकी बुआ ने सोचा कॉलेज के  लड़के होंगे जो दारु के नशे में हैं, ऐसा सोच ही रही थी की वो लड़के बुआ के पास आये, बुआ ने देखा जिसको सहारा देकर ये ला रहे थे वो, उसका भतीजा है, दोनों लड़के बोले आंटी संभालो अपने भतीजे को, बुआ ने पूछा क्या हुआ इसे, वो बोले दारु पीकर नाली में पड़ा था, और कुछ कुत्ते इसका मुँह चाट रहे थे, और हम इसको  यहाँ ले आये , बुआ ने उन लड़को को thank you बोला और अपने भतीजे को अंदर ले गई, लड़का होश में नही था,  बुआ को उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था, और रोना भी, बुआ ने सोचा कल जब होश में आएगा तब बताऊँगी इसे। अगली सुबह बुआ ने उसे सुबह नीम्बू - पानी दिया पीने को, और उसने पिया, बुआ ने पूछा  कैसा लग रहा है,लड़का बोला अच्छा लग रहा है, ऐसा बोलते ही बुआ ने उसके दोनों गालों में  थप्पड़ों की बरसात कर दी, और उसको कुत्ता - कमीना, साला, गाली दी, थप्पड़ खाकर उसकी खुमारी उतर गई, बुआ ने बोला इसीलिए रु मांगे थे तूने, ऐसे अपनी ज़िन्दगी बनाएगा, वो तो भला हो उन लड़को का जो तुझे घर तक ले आये, इतने में लड़का बोला क्या भला हो, उन्ही दोनों के साथ तो पी थी मैंने, बुआ ने उसे बहुत मारा, और बोला ये सब करने के लिए ही गाऊँ से तुझे लेके आई, तेरे घर वालों को पता चलेगा तो मुझे ही दोष देंगे, इतने में लड़का बोला बुआ गलती हो गयी  माफ़ कर दो, अब कभी  ऐसा नही करूँगा, और मम्मी - पापा को मत बताना, बुआ ने बोला ठीक है, लेकिन ये बता तूने इस गलती से क्या सीखा, लड़का बोला " रु 500 में ज़िन्दगी नही बनती है, इसीलिए आप कल मुझे  1000 रु देना, बुआ ने बोला क्यों? लड़का बोला कल फिर से नयी ज़िन्दगी बनाऊंगा। बुआ कुछ नही बोली।सिर्फ उसे देखती ही रह गई।    

Saturday, 4 July 2015

निवेदन है कि ये मैसेज ज़रूर पढ़ें-


आजकल एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में, वह यह कि जैसे ही कोई त्यौहार आने वाला होता है, खुद हिन्दू ही उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो उनके ऊपर बोझ है :

1) रक्षाबंधन पर मूर्खता :
कुछ हिन्दू ऐसे मैसेज भेजते हैं कि ||कोई भी अनजान चीज को हाथ नहीं लगाये, उसमें राखी हो सकती है !! ||

अरे कूल dude !! तुम्हारे लिए अपनी बहन बोझ बन रही है?? तुम तो राखी का मज़ाक़ बना बैठे हो, तुम क्या अपनी माँ बहन की रक्षा करोगे? राखी एक रक्षा सूत्र है, अगर तुम भूल रहे हो तो याद दिलाऊँ राजस्थान में औरतें अपनी रक्षा के लिए जोहर कर आग में कूद जाती थी।

रानी पद्मिनी के साथ 36000 औरतें जोहर हो गयी थीं। एक महिला की रक्षा मज़ाक लगती है???

2) दशहरा पर मूर्खता :
यह मैसेज आजकल खूब प्रचलन में है कि || रावण सीता जी को उठा ले गया है और राम जी लंका पर चढ़ाई करने जा रहे हैं, उसके लिये बंदरो की आवश्यकता है, जो भी मैसेज पढ़े तुरंत निकल जाये ||

वाह!!! आज सीता अपहरण हिन्दुओं के लिए मज़ाक़ का विषय हो गया है। जोरू का गुलाम बनना गर्व का विषय और राम का सैनिक बनना मज़ाक़ हो रहा है!!!

दूसरा जोक || रावण को कोर्ट ले जाया गया व कहा गया कि गीता पर हाथ रख कसम खाओ तब रावण कहता है सीता पर हाथ रखा उसमें इतना बवाल हो गया, गीता पर रखा तो......||

यह बड़े शर्म की बात है कि अग्नि परीक्षा देने के बाद भी आज हिन्दू सीता माता के चरित्र पर सवाल उठाने को मज़ाक़ समझते हैं। कभी अपनी माता के बारें में ऐसे मज़ाक़ उड़ाया? अगर नहीं तो तुम्हें किसने हक दिया समस्त हिंदुत्व की माता पर हाथ रखने को मज़ाक़ बनाने का ????

एक हमारा मीडिया पहले ही हिन्दू त्यौहारों के पीछे पड़ा है-
होली पर पानी बर्बाद होता है लेकिन ईद पर जानवरों की क़ुरबानी धर्म है!

दिवाली पर पटाके छोड़ना प्रदूषण है पर ईसाई नव वर्ष पर आतिशबाजी जश्न है!

नवरात्री पर 10 बजे के बाद गरबा ध्वनि प्रदूषण हो जाती है, वहीं मोहरम की रात ढोल ताशे कूटना और नववर्ष की रात जानवरों की तरह 12 बजे तक बाजे बजाना धर्म है!!!

करवा चौथ और नाग पंचमी पाखंड है वहीं ईसा का मरकर पुनः लौटना गुड फ्राइडे वैज्ञानिक है!!

हिन्दुओं को यह लगता है कि अपने पर्व का मज़ाक़ बनाना सही है तो इससे बड़ी लानत क्या होगी??

हम राखी और सीता अपहरण पर मज़ाक़ करते हैं, इसके पीछे समाज की मानसिकता बनती है। लोग लड़की की रक्षा से कतराते हैं , क्योंकि राखी को हमने मज़ाक़ बना दिया है, हमने सीता माता जैसी पवित्र माँ का मज़ाक़ बना दिया है। इससे पता चलता है हम कितने धार्मिक हैं!

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हिन्दू धर्म की विडंबना देखिए :-

जन्माष्टमी आयी तो श्री कृष्ण को टपोरी तडीपार और ना जाने क्या-क्या कहा!

गणेश जी आये तो उनका भी मज़ाक़ बनाया!

नवरात्रि आयी तो ये चुटकुला आया "नौ दिन दुर्गा-दुर्गा फिर मुर्गा-मुर्गा..."

विजयादशमी पर श्री राम-माता सीता और रावण पर चुटकुले चले!

अब होली पर भी कुछ आ जायेगा!

कभी सोचा है ओरिजनली कौन ये सब पोस्ट कर रहा है??? ये कभी किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की.. बस अपने मोबाइल पर आया तो बिना सोचे समझे फॉरवर्ड करने की वही भेड़ चाल चालू..!!
इस तरह के मैसेज बनाने वाले जानते हैं कि हम हिन्दू अपने धर्म को लेके सजग नहीं हैं और एडवांस्ड दिखने के चक्कर में कुछ भी फॉरवर्ड कर देंगे. तभी ये ऐसे मैसेज बनाकर सर्कुलेट करते हैं!!

किसी और धर्म के लोगों को उनके धर्म के जोक्स पढ़ते या फॉरवर्ड करते देखा है?? उनको तो छोड़ो, आप भी उनके के जोक्स फॉरवर्ड करने से पहले 10 बार सोचते हो कि किसको भेजूँ-किसको नहीं?? तो हिन्दू धर्म का मज़ाक़ उड़ाते शर्म नहीं आती..??

मेरा क्रमबद्  निवेदन है कि अपने हाथों से अपने धर्म का अपमान ना करें..🙏

Wednesday, 17 June 2015

ये वही शास्त्री जी है जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री रहते समय लाहौर पे ऐसा कब्ज़ा जमाया था की पुरे विश्व ने जोर लगा लिया लेकिन लाहौर देने से इनकार कर दिया था

ये वही शास्त्री जी है जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री रहते समय लाहौर पे ऐसा कब्ज़ा जमाया था की पुरे विश्व ने जोर लगा लिया लेकिन लाहौर देने से इनकार कर दिया था | आख़िरकार उनकी एक बड़ी साजिस के तहत हत्या कर दी गयी | जिसका आज तक पता नहीं लगाया जा सका है |
1. जब इंदिरा शाश्त्रीजी के घर (प्रधान मंत्री आवास ) पर पहुची तो कहा कि यह तो चपरासी का घर लग रहा है, इतनी सादगी थी हमारे शास्त्रीजी में...
2. जब 1965 मे पाकिस्तान से युद्ध हुआ था तो शासत्री जी ने भारतीय सेना का मनोबल इतना बड़ा दिया था की भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को गाजर मूली की तरह काटती चली गयी थी और पाकिस्तान का बहुत बड़ा हिस्सा जीत लिया था ।
3. जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कहाथा की भारत युद्ध खत्मकर दे नहीं तो अमेरिकाभारत को खाने के लिए गेहू देना बंद कर देगातो इसके जवाब मे शास्त्री जी ने कहाकीहम स्वाभिमान से भूखे रहना पसंद करेंगे किसी के सामने भीख मांगने की जगह । और शास्त्री जी देशवासियों से निवेदन किया की जब तक अनाज की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक सब लोग सोमवार का व्रत रखना चालू कर दे और खाना कम खाया करे ।
4. जब शास्त्री जी तस्केंत समझोते के लिए जा रहे थे तो उनकी पत्नी के कहा की अब तो इस पुरानी फटी धोती कीजगह नई धोती खरीद लीजिये तो शास्त्री जी ने कहा इस देश मे अभी भी ऐसे बहुत से किसान है जो फटी हुई धोती पहनते है इसलिए मै अच्छे कपडे कैसे पहन सकता हु क्योकि मै उन गरीबो का ही नेता हूँ अमीरों का नहीं और फिरशास्त्री जी उनकी फटी पुरानी धोती को अपने हाथ से सिलकर तस्केंत समझोते के लिए गए ।
5. जब पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था तो शास्त्री जी ने देशवासियों से कहा की युद्ध मे बहुत रूपये खर्च हो सकते है इसलिएसभी लोग अपने फालतू केखर्च कम कर देऔर जितना हो सके सेना को धन राशि देकर सहयोगकरें । और खर्च कम करने वाली बात शास्त्री जी ने उनके खुद के दैनिक जीवन मे भी उतारी । उन्होने उनके घर के सारे काम करने वाले नौकरो को हटा दिया था और वो खुद ही उनके कपड़े धोते थे, और खुद ही उनके घर की साफ सफाई और झाड़ू पोंछा करते थे ।
6. शास्त्री जी दिखन?े मे जरूर छोटे थे पर वो सच मे बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे ।
7. जब शास्त्री जी की मृत्यु हुई तो कुछ नीचलोगों ने उन पर इल्ज़ाम लगाया की शास्त्री जी भ्रस्टाचारी थे पर जांच होने के बाद पता चला की शास्त्री जी केबैंक के खाते मे मात्र365/- रूपये थे । इससे पता चलता है की शास्त्री जी कितने ईमानदार थे ।
8. शास्त्री जी अभी तक के एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री रहे हैं जिनहोने देश के बजट मे से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर खर्च करनेका फैसला लिया था । शास्त्री जी हमेशा कहते थे की देश का जवान और देश का किसान देश के सबसे महत्वपूर्ण इंसान हैं इसलिए इन्हे कोई भी तकलीफ नहीं होना चाहिए और फिर शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया ।
9.जब शास्त्रीजि तस्केंत गए थे तो उन्हे जहर देकर मार दिया गया था और देश मे झूठी खबर फैला दी गयी थी की शास्त्री जी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई । और सरकार ने इस बात पर आज तक पर्दा डाल रखा है ।
10 शास्त्री जी जातिवाद के खिलाफ थे इसलिए उन्होने उनके नाम के आगे श्रीवास्तव लिखना बंद कर दिया था ।
हम धन्य हैं की हमारी भूमि पर ऐसे स्वाभिमानी और देश भक्त इंसान ने जन्म लिया । यह बहुत गौरव की बात है की हमे शास्त्री जी जैसे प्रधान मंत्री मिले ।
जय जवान जय किसान !
शास्त्री जी ज़िंदाबाद !
इंकलाब ज़िंदाबाद !.
इतना शेयर करो की हर गली-मोहल्ले मे अब तो ये बात पहुँचनी चाहिए!
आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति

Tuesday, 16 June 2015

china Developed a most lethal Hypersonic Nuclear weapon.Other countries Defence system is not able to defence China's this weapon.



The fourth successful test of hypersonic glide vehicle - which the US has dubbed the "Wu-14" - was carried out on Sunday. It was the People Liberation Army's fourth test of the weapon in 18 months.
"The scheduled scientific research and experiments in our territory is normal, and those tests are not targeted at any country and specific goals," Hong Kong-based South China Morning Post quoted the defence ministry as saying.But military observers said the
frequency of the tests showed Beijing was reinforcing its nuclear deterrent in response to Washington's continued interference in China's territorial disputes in the region, the Post reported.
US website the Washington Free Beacon, which first reported about the test, said the new strike vehicle is considered a high-technology strategic weapon capable of delivering nuclear or conventional warheads while travelling on the edge of space.
One of its key features is the ability to manoeuvre to avoid US missile defences, it said.
The Wu-14 was assessed as travelling up to 10 times the speed of sound, or around 7,680 miles per hour, it said.
Unlike earlier tests, the latest test demonstrated what one official called "extreme maneuvers" that appeared to analysts designed for penetrating through missile defense systems, it said.
The test took place a day before Central Military Commission vice-chairman Fan Changlong left for a week-long visit to the US. He since completed the visit during which he held talks with US Defence Secretary Ashton Carter.
Experts say the launch was timed to raise Fan's bargaining power in discussions with the US, as well as to express Beijing's disapproval of Washington's sustained interference in the South China Sea, the Post reported.
"The test is aimed at helping Fan increase the People's Liberation Army's bargaining power on the negotiation table when he deals with his US counterpart," Macau-based military observer Antony Wong Dong said.
China's this   hypersonic strike vehicle, signaling that Beijing is working on a new ultra- high speed weapon system that can breach the existing missile shield of the United States.